14 जनवरी को पूरे देश में Makar Sankranti का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य Dhanu Rashi से निकलकर Makar Rashi में प्रवेश करता है, इसीलिए इसे Makar Sankranti कहा जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, इसलिए इसे Uttarayan Sankranti के नाम से भी जाना जाता है।
मकर संक्रांति से Kharmaas समाप्त होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। ये दिन पिता-पुत्र के रिश्ते को मजबूत करने का संदेश भी देता है, क्योंकि सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इसके बाद सूर्य कुंभ राशि में भी एक मास रहते हैं।
सूर्य के मकर राशि में आने पर Shani Dev से संबंधित वस्तुओं का दान और सेवन शुभ माना जाता है। ये कुंडली में उत्पन्न ग्रह दोषों को शांत करता है और सुख-समृद्धि लाता है।
मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है ?
- सूर्य पूजा और अर्घ्य: इस दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पूजा-पाठ करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
- दान का महत्व: तिल-गुड़ और खिचड़ी का दान करना इस दिन बेहद शुभ माना जाता है।
- पितरों का तर्पण: पितरों का तर्पण करने से Pitru Dosh समाप्त होता है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
- पवित्र स्नान: पवित्र नदियों में स्नान करना पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करता है। विशेष रूप से गंगा स्नान का महत्व बताया गया है।
मकर संक्रांति पर किन चीजों का दान करें?
इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। आप इन चीजों का दान कर सकते हैं:
- काले तिल
- खिचड़ी
- उड़द की दाल
- घी से बनी चीजें
देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति के नाम
Makar Sankranti को हर राज्य में अलग नाम और रीति-रिवाजों से मनाया जाता है।
- लोहड़ी (पंजाब)
- पोंगल (तमिलनाडु)
- उत्तरायण (गुजरात)
- बिहू (असम)
- गुघुती (उत्तराखंड)
मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है वैज्ञानिक कारण
मकर संक्रांति को सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर भी महत्व दिया गया है। ये दिन खगोलीय घटनाओं और सूर्य की स्थिति में बदलाव को दर्शाता है, जो पृथ्वी पर मौसम और कृषि से जुड़े प्रभाव डालता है।
1. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (Tropical and Sidereal Movement)
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे खगोलीय दृष्टि से Winter Solstice के बाद की घटना माना जाता है, जहां सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ने लगता है। इस खगोलीय घटना को Uttarayan कहते हैं, जिसका अर्थ है सूर्य का उत्तरायण होना।
2. दिन और रात की अवधि में बदलाव
मकर संक्रांति के बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। ये पृथ्वी के झुकाव (Earth’s Tilt) और सूर्य के साथ उसके संबंध के कारण होता है। ये बदलाव गर्मी के मौसम के आगमन का संकेत देता है, जिससे कृषि और मौसम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
3. कृषि और फसल चक्र से जुड़ाव
ये पर्व नई फसल और रबी सीजन की शुरुआत का प्रतीक है। इस समय खेतों में नई फसल तैयार होती है, और किसान इसे प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के रूप में मनाते हैं।
4. शरीर और स्वास्थ्य पर प्रभाव
- मकर संक्रांति के दौरान सूर्य की किरणें सीधी और तेज़ होती हैं, जो Vitamin D का प्राकृतिक स्रोत हैं। ये शरीर के लिए बेहद लाभकारी है।
- सर्दियों के बाद सूर्य की बढ़ती गर्मी स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
5. तिल और गुड़ का महत्व
इस दिन तिल और गुड़ खाने और दान करने की परंपरा है। इसका वैज्ञानिक कारण ये है कि सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तिल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थ फायदेमंद होते हैं।
6. नदियों में स्नान का महत्व
पवित्र नदियों में स्नान का धार्मिक महत्व तो है ही, लेकिन इसका वैज्ञानिक कारण ये है कि सर्दियों में ठंडे पानी में स्नान शरीर की रक्त संचार प्रणाली को सक्रिय करता है और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है।